परमेष्वर के राज्य के लिए यह एक कार्य योजना है। ईसाई धर्म का अंतिम लक्ष्य इस पृथ्वी पर प्रेम और शांति स्थापित करना है। संभावित दोष कहाँ है, पता चले तो समाधान ढूंढ ही लेंगे।
झूठ की मानसिकता की स्थापना
अगर डॉक्टर विशाल मंगलवादी जी की मानें तो भारत को स्वतंत्रता बाइबल ने दीलाई है। महात्मा गांधी ने नहीं। तो मार ही पड़ेगी, पर सच भी यही है कि ब्रिटिश संसद ने चार्टर ऑफ इंडिया एक्ट-1833 द्वारा भारत को स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव पारित हुआ (जिसे मैकोल ने लाया था) और मजे की बात है कि महात्मा गांधी का जन्म, प्रस्ताव लाने के 36 साल बाद हुआ था…!!
ऐसी झूठ की मानसिकता से ईसाई धर्म भी ग्रसित हैं, जैसे कि :-
- आप के लिए प्रार्थना करेंगे वास्तव में हम जिम्मेदारी और काम करने से भाग रहे हैं। दाऊद ने गोलियथ का सामना करने के लिए क्या सिर्फ प्रार्थना करी थी? भविष्यद्वक्ता नेहेमीमिया ने मंदिर बनाने के लिए क्या सिर्फ प्रार्थना करी थी? बाइबल के सत्य को समझने और समझाने में बहुत अंतर आ गया है। अगर हम इसी परिपाटी पर चलते रहे, तो आने वाले दशकों में भारत का ईसाई धर्म भूमिगत होने का ही रास्ता बचेगा।
- हम में एकता नहीं है हर कोई यहीं रोना रोते आ रहा है। लेकिन ठीक करने के लिए किसी के पास कोई विकल्प या सोच ही नहीं है। जब भी कोई योजना विफल होती है, तो सरकार, तुरंत मूल कारण का विश्लेषण करती है। ईसाई समाज को मूल कारणों के विश्लेषण की आवश्यकता है। बुद्धि जीवी वर्ग को विकसित करना समय की मांग है। ठोस कार्य योजना तैयार करनी ही पड़ेगी।
- राजनीतिक उत्तरदायित्व छत्तीसगढ़ में 2006 में भाजपा ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक लाया, तब कांग्रेस ने विरोध किया। फिर 2021 में कांग्रेस ने धर्मातरण विधेयक लाया, तब भाजपा ने इसका विरोध किया। राजनीतिक दलों के लिए ईसाई समुदाय एक फुटबॉल है। जब चाहें लात मारते रहो। अपनी मतदान की शक्ति को एकजुट किए बिना, हम एक फुटबॉल ही बने रहेंगे।
- भाषीय-बाधा पंजाब को केरल या कर्नाटक की पीड़ा समझ नहीं आती, क्यों की भाषाई बाधा है। ऐसा सेतू खोजें जो पंजाब और केरल की बात एक साथ समझ सकें। तब एकजुट होने की सोच सकते हैं। बात करें बगैर संगठित होना असंभव है। विष्वासियों के बीच भाषाई बाधा को हल करना है
- राष्ट्रीय या अन्य समुदायिक मुद्दों से हम अनभिग्य रहते हैं। मतदाता सूची विवाद हो, तेजस का जल जाना, दलित को शादी में घोड़े पर चढ़ने नहीं देना, जैसे मुद्दों पर
