अरुण पन्नालाल-मेरे पिताजी रायल आरम्ड फोर्स में थे। आजादी के बाद भारतीय सेना फिर 1962 चाइना एग्रेशन में सिर्फ एक मोज़ा और केनवास के जूतों में माईनस बीस डिग्री में लड़े, लौटे तो गैंग्रीन ग्रस्त पांव थे। ठीक हुए और पाकिस्तान 1965 में वालंटियर किया,चाहते तो युद्ध में नहीं जाते।1971 नवंबर का पाकिस्तान हमला बाखूबी याद है। श्रीनगर 92 जी एच में रहते थे। जब सेबर जेट बम्बारी करते तब मेरा पूरा परिवार -4° में खुले मैदान में जान बचाएं लेटे रहते थे।
हैरान हूं देखकर जिन्हों ने नाखून तक का बलिदान नहीं दिया हमें देशद्रोही ठहरा रहे हैं। मैं ईसाई घराने में अपनी मर्जी से पैदा नहीं हुआ, पर अपने धर्म के लिए वफादार रहूंगा। मेरे पूर्वजों की विरासत वफादारी थी और मेरी भी यही रहेगी।
एक फेसबुक पोस्ट की तकनीकी त्रुटि, जिसकी गलत फहमी भी दूर हो गई थी। विरोध में आधुनिक देश भक्त मेरे घर के सामने नंगा नाच रहे हैं। महिलाओं को अपशब्द बोल रहे हैं, गिरफ्तारी का नारा लगा रहे हैं? फौज में अभिवादन “राम-राम भाई” कितनी सरलता से बोलते रहे,आज उसी भगवान के नाम से मेरा घर जला रहे हो? तुम्हें मुबारक हो,मेरा ईमान मुझे मुबारक।
खैर यह दौर देखना था देख लिया। हमारी फौजी पीढ़ी ने जान देते वक्त, क्या पूछा की क्या मैं हिन्दू, सिख, ईसाई या मुसलमान के लिए जान दे रहा हूं? देश मेरा भारत है, था और रहेगा…सौ सौ आहूति कुर्बान …
ईसाई धर्म में अपनी मर्जी से पैदा नहीं हुआ,वहीं मरूंगा भी। देश,धर्म की वफादारी बदल लूं, ऐसे सौदे हमारे खून में नहीं। सब को नमस्कार 🙏🏼
~अरुण पन्नालाल
